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Shri Radhavallabh KunjBihari❤️ (English)

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09 Feb, 14:12


🙏🏻🌹श्री लाडली जू महाराज के आज शुभ संध्या आरती दर्शन श्री राधे श्याम 🌹🙏🏻

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04 Feb, 04:29


🙏🏻🌹श्री लाडली जू महाराज के आज शुभ शृंगार आरती दर्शन श्री राधे श्याम 🌹🙏🏻

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02 Feb, 14:33


आज बसंत पंचमी के पावन पर्व पर श्रीजी के दिव्य संध्या आरती दर्शन ❤️🫶🏻

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02 Feb, 04:41


आज बसंत पंचमी के पावन पर्व पर श्रीजी के दिव्य श्रंगार आरती दर्शन ❤️🫶🏻

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22 Jan, 14:24


🙏🏻🌹श्री लाडली जू महाराज के आज शुभ शृंगार आरती दर्शन श्री राधे श्याम 🌹🙏🏻

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14 Jan, 14:16


Channel photo updated

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03 Jan, 04:42


🙏🏻🌹श्री लाडली जू महाराज के आज शुभ शृंगार आरती दर्शन श्री राधे श्याम 🌹🙏🏻

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02 Jan, 03:48


श्री हरि

जब प्रवचन के मध्य पूज्य भाई जी पोद्दार जी महाराज बोले कि गीता भवन के इस नंबर कमरे में श्रीकृष्ण भगवान एक भक्त माता को दर्शन दे रहे हैं
एक बार गीता भवन ऋषिकेश में पूज्य भाई जी का प्रवचन चल रहा था । उन दिनों वहाँ ग्रीष्म ऋतु में 3-4 महीने सत्संग होता था । एक बद्रीदास नाम जी के भक्त थे जो रिश्ते में सेठ श्रीजयदयाल गोयेंदका जी के चाचा लगते थे । उनकी पत्नी भी बहुत भक्त थी । प्रवचन के मध्य ही पूज्य पोद्दार जी महाराज भाव विभोर हो कर बोले - “ इसी गीता भवन के कमरा नंबर इस में भगवान श्रीकृष्ण बद्रीदास जी की पत्नी को प्रकट हो कर प्रत्यक्ष दर्शन दे रहे हैं “ । सेठ जयदयाल गोयेंदका जी उस समय वही मंच पर ही विराजमान थे । बद्रीदास जी तभी सेठ जी बोले कि - “ शायद भाई जी भावुकता में बोल पड़े!?” । सेठ जी बोले - “ नहीं , भाई जी सत्य बोले हैं , उनको दर्शन मिल रहा है लेकिन भाई जी को ये बात बोलनी नहीं चाहिए थी “ । अर्थात् सेठ जी की भी इतनी ऊँची स्थिति थी कि वो भी देख पा रहे थे कि भगवान श्रीकृष्ण बद्रीदास जी की पत्नी को दर्शन दे रहे हैं । जब पूज्य भाई जी प्रवचन समाप्त कर मंच से उठकर के जाने लगे तो सेठ जी ने संकेत कर के समीप बुलाकर के कहा - “ आपने क्यों बोल दिया ? । प्रवचन में ये बात बोली जाती है कि भगवान उस कमरे में दर्शन दे रहे हैं ? ! “ पूज्य भाई जी भाव विभोर हो बोले - “ मुझसे रुका नहीं गया _ मैं क्या करता । इतना मुझे आनंद आ रहा था जब प्रभु कृपा से मुझे दिखलायी पड़ा तो मैं बोल पड़ा “ । सेठ जी बोले - “ चलो अब तो मुख से निकल गया , किंतु बताना नहीं चाहिए सब को “ ।
इसके बाद पूज्य सेठ जी एवं भाई जी बद्रीदास जी की पत्नी के कमरे में गए । वहाँ सेठ जी बद्रीदास जी की पत्नी से बोले कि- “ भाई जी ने तो वहाँ सब को बता दिया किभगवान ने आपको दर्शन दिए , अब हम को तो बता दो कि क्या दर्शन मिला “ । बद्रीदास जी की पत्नी बोली - “ दर्शन तो कन्हैया जी ने कल भी दिया था , कल कंबल ओढ़ कर आए थे , एकदम मोटा खुरदरा कंबल , तो मैंने कहा कि बहुत ज़्यादा तुमको चुभ रहा होगा , अब कल तुम पीताम्बर ओढ़ कर के आना , तो आज पीताम्बर ओढ़ कर के आए थे । खूब हँस रहे थे । मुझे बहुत आनंद आ रहा था दर्शन कर के , और आप लोगो को वही सत्संग भवन से दिख गया कि मेरे सामने प्रभु खड़े हैं “ । तो सेठ जी भाई जी बोले - “ हाँ _ हम को भगवान ने दिखला दिया था “ ।

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01 Dec, 14:33


सूरध्वज के गुड़ का पुआ..............
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भोर मंगल आरती होने से पहले असमय, भोग का समय नहीं है। असमय श्री ठाकुर जी को भोग लगाकर संतुष्ट किया।
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दो सूरदास हुए एक तो सूरदास जी श्रीनाथ जी के परम भक्त और एक हुए सूरदास मदन मोहन। बादशाह अकबर के सूबेदार थे।
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उत्तर प्रदेश में एक स्थान संडिला, वहाँ के सूबेदार मदनमोहन। सूरध्वज वैसे उनका नाम था। भक्त लोग उनको प्यार से सूरदास कहते थे।
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मदन मोहन जी के परम भक्त। बादशाह के दीवान लेकिन परम भक्त। श्री ठाकुर जी के रूप माधुरी की अनन्य मधुकर।
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सतत् श्वास-श्वास से युगल का नाम जपते और बादशाह की नौकरी करते थे।
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एक बार संडिला के बाजार में गुड़ देखा। अब गुड़ देखते ही मन में आया कि इसका तो श्री ठाकुर जी को भोग लगना चाहिए।
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अब वृंदावन का जो ठाकुर है ना, वो राग और भोग का ठाकुर है। उसको रिझाने की विधि क्या है?
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सुन्दर-सुन्दर भोग और सुन्दर-सुन्दर राग इसी से रीझते हैं।
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जैसे ही सुन्दर सा वो बड़ा नवीन गुड़ देखा, गुड़ देखते ही सूरदास जी के मन में आया कि ये तो श्री ठाकुर जी की सेवा में उपस्थित हो जाए।
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कोई मिष्ठान बने, कोई पकवान बने। ठाकुर जी को पाकर कितना सुख होगा। गुड़ बैलगाड़ियों पर लदवाकर वृंदावन भेजने लगे।
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किसी ने कहा, जितने दिन में ये गुड़ वृंदावन पहुँचेगा और जितना धन आप इस गुड़ को वृंदावन पहुँचाने में खर्च करेंगे, उतने में तो वृंदावन में ही इससे 20 गुना अधिक गुड़ खरीद लिया जाएगा।
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इतना समय लगेगा। इतना धन आप व्यय करेंगे। इससे 20 गुना अधिक गुड़ खरीदा जा सकता है उस धन से, वहीं वृंदावन से।
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सूरध्वज जी ने कहा, प्रेमी की दुनिया अलग होती है और फिर ये प्रेम का पथ है। भगवद् रसिक, रसिक की बातें, रसिक बना कोई समझ सके ना।
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सूरध्वज जी ने कहा कि, तुम नहीं समझोगे कि इस गुड़ की महिमा क्या है? ये तो केवल रसिक शेखर श्याम सुन्दर जानते हैं।
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उसी समय बैल गाड़ियों में भरवाकर गुड़ भिजवाया। 20 दिन में वो गुड़ वहाँ संडिला से वृंदावन पहुँचा और जब वृंदावन पहुंचा तो श्री ठाकुर जी की शयन आरती हो चुकी थी। श्री ठाकुर जी का शयन हो चुका था।
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श्री ठाकुर जी ने मन में विचार किया भाई सुबह तक तो हमसे प्रतीक्षा होगी नहीं। गुड़ पहुँचा है तो भोग अभी लगना चाहिए।
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क्या किया जाए? शयन हो चुका, ठाकुर को पौढ़ा दिया गया था शैय्या पर और यदि ये गुड़ पुजारी के हाथ लग गया तो वो तो इसे भण्डार में धरवा देगा।
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वो क्या जाने इस गुड़ की महिमा क्या है? उसके लिए तो क्या आया है? गुड़ आया है और ऐसा गुड़ भण्डार में पहले रखा है।
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वो विचार करेगा जो वस्तु पहले रखी है, पहले भोग में उसे खर्च करना चाहिए। इसे बाद में खर्च करेंगे।
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श्री ठाकुर जी ने स्वप्न में पुजारी को आदेश दिया। सुनो अभी सूरध्वज के यहाँ से गुड़ आया है, पुआ बनाओ और हमें भोग लगाओ।
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पुजारी ने कहा कि आपकी सज्जा के पास इतना भोग रखा है। जाड़े के दिन अब आधी रात को किस प्रकार मैं रसोइये को बुलाऊँ, फिर पुआ बनवाऊँ और आपको भोग लगाऊँ।
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यदि आपको पुआ पाने की इच्छा ही है तो सुबह तक प्रतीक्षा कर लीजिए।
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ठाकुर जी ने पुजारी से कहा तू बड़ा मूर्ख है। तुझे दिखाई नहीं पड़ता इस गुड़ की राह देखते-देखते मेरी आँखे सूज गई
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20 दिन से मैं प्रतीक्षा कर रहा हूँ कि कब गुड़ आए और मैं भोग लगाऊँ और तू मुझे प्रतीक्षा करने के लिए कहता है।
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मनमोहन की मनभावन वाणी सुनकर पुजारी का हृदय विचलित हो गया। दौड़कर गया, स्नान किया, रसोई में जाकर सब व्यवस्था कराई और भोर मंगल आरती होने से पहले असमय, भोग का समय नहीं है।
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असमय श्री ठाकुर जी को भोग लगाकर संतुष्ट किया।

Shri Radhavallabh KunjBihari❤️

21 Nov, 03:51


🙏🏻🌹श्री लाडली जू महाराज के आज शुभ शृंगार दर्शन श्री राधे श्याम 🌹🙏🏻

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05 Nov, 03:52


🙏🏻🌹श्री लाडली जू महाराज के आज शुभ शृंगार दर्शन श्री राधे श्याम 🌹🙏🏻

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02 Nov, 05:07


जय जय श्री राधे 🌹🙏🙏

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01 Nov, 06:52


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25 Oct, 14:31


🙏🏻🌹श्री प्रिया प्रियतम के आज शुभ संध्या दर्शन श्री राधे श्याम 🌹🙏🏻

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